मजदूर एकता पुस्तिका- ५

मजदूर एकता पुस्तिका- ५
संपादकीय (अंक 5)

भूमिका

कोरोना महामारी और उसके बाद मजदूर वर्ग और अन्य मेहनतकश जनता को भयावह दुख–तकलीफें झेलनी पड़ी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पिछले तीन सालों में देश में 5 लाख से अधिक लोेगों की कोविड महामारी से मौत हो गयी। करोड़ों लोग तरह–तरह की बीमारियों का सामना कर रहे हैं। इस दौरान सरकार ने महामारी का सामना करने और जनता की मदद पहुँचाने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इससे देश भर में उसकी बहुत भद्द पिटी और चारों तरफ आलोचना हुई। इससे घबराकर सरकार ने दिखावे के लिए ही सही असंगठित मजदूरों का ई–श्रम कार्ड बनवाना शुरू किया। सरकार ने दावा किया कि इससे मजदूरों को नये रोजगार मिलेंगे और उनकी कमाई बढ़ेगी। भविष्य को लेकर उनका डर कम होगा।

इसके बाद ई–श्रम पोर्टल बनाया गया और देश भर के कुल 28  करोड़ से अधिक मजदूरों को इस पोर्टल पर पंजीकृत किया गया। इनमें से सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के 8–30 करोड़ मजदूर पंजीकृत किये गये। इनमें 156 क्षेत्रों के मजदूर शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से खेत और ग्रामीण मजदूर, मनरेगा, निर्माण, घरेलू कामगार, वाहन चालक, रिक्शा चालक, ठेले वाले, बुनकर या चिकनकारी कारीगर, कुटीर और छोटे उद्योगों के मजदूर, आंगनवाड़ी, आशा वर्कर, र्इंट–भट्ठा और खनन के मजदूर शामिल हैं।

योजना में आश्वासन दिया गया है कि कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा पाने वालों को छोड़कर, पंजीकृत सभी लोगों को सरकार की योजनाओं के लाभ मिलेंगे। आज पंजीकरण के दो साल बाद भी मजदूरों के लिए सरकार कोई योजना लेकर नहीं आयी। केन्द्र और राज्य सरकारें मजदूरों के नाम पर बहुत प्रचार करती हैं और बड़ी घोषणाएँ करती हैं, लेकिन करती कुछ नहीं हैं। इससे मजदूर काफी गुस्से में हैं।

आज मजदूरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 12–16 घण्टे काम कराया जा रहा है। कई मजदूर बेरोजगारी की समस्या का सामना कर रहे हैं और रोजगार के लिए दर–दर भटक रहे हैं। कई जगहों पर मजदूरों से काम कराकर उनकी निर्धारित मजदूरी नहीं दी जा रही है और मजदूरी के नाम पर उन्हें दौड़ाया जा रहा है या उनके साथ मारपीट की जा रही है। सभी जगहों पर न्यूनतम मजदूरी इतनी कम है कि इस महँगाई के जमाने में मजदूर अपने परिवार का गुजारा नहीं कर पा रहे हैं। कई जगहों पर उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी वंचित किया जा रहा है। इसके बाद भी सरकार उनके लाभ के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।

ई–श्रम पोर्टल पर मजदूरों से सभी विवरण, जैसे नाम, व्यवसाय, पता, व्यवसाय का प्रकार, शैक्षिक योग्यता, कौशल आदि ले लिये गये और सरकार ने दावा किया की इस जानकारी का इस्तेमाल मजदूरों को अधिक लाभ पहुँचाने में किया जायेगा। उनकी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी लागू किया जायेगा। लेकिन ऐसा कुछ न करना मजदूरों के प्रति गन्दा मजाक है और सरकार के बड़े–बड़े दावों को उजागर करता है। हद तो यह हो गयी है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद, राज्य सरकारों ने उन प्रवासी या असंगठित मजदूरों का राशन कार्ड नहीं बनाया जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं और जो ई–श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं।

अब सरकार के इस रवैये से तंग आकर प्रदेश के मजदूर–– आंगनवाड़ी और भोजन कार्यकर्ता, ऑटो–रिक्शा चालक, वन श्रमिक, महिला घरेलू कामगार, यूपी भवन और अन्य निर्माण मजदूर, कुली, ई रिक्शा चालक, बेकरी श्रमिक आदि आन्दोलन के लिए कमर कस चुके हैं।

आज मजदूर अपने आन्दोलन में कई माँगें उठा रहे हैं, जैसे–– न्यूनतम मासिक वेतन 26,000 रुपये, आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ, मजदूरों को पेंशन की गारंटी, मुफ्त शिक्षा की गारंटी, मृत्यु और दुर्घटना बीमा, उचित आवास और क्रेच की सुविधा आदि।

सरकार की इस अनदेखी के खिलाफ मजदूरों के पास आन्दोलन का रास्ता ही बचा हुआ है। अगर मजदूर अपनी उचित माँग को लेकर लगातार और जुझारू आन्दोलन नहीं चलाते तो उन्हें उनका हक नहीं मिलेगा।

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