कम्पनी में काम का मेरा अनुभव
08 Jun 2025
• फासीवादी हमलों के खिलाफ संघर्ष के लिए आगे आओ!
मजदूरों पर अत्याचार हो रहे है और मजदूरों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। मैं खुद भी एक आम मजदूर हूँ और उत्तराखण्ड के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में एक प्राइवेट कम्पनी में ठेकेदार के नीचे काम करता हूँ। हम अपनी औकात से अधिक काम करते हैं फिर भी हमारे साथ हमारे ही सीनियर, कम्पनी में ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों और कम्पनी मालिक द्वारा अत्याचार किया जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि शिक्षित होकर के भी हम श्रम कानूनों और अपने अधिकारों के बारे में नहीं जानते हैं। यह बहुत दुर्भाग्य की बात है।
कम्पनी में काम करते समय हमें डराया जाता है, प्रमोशन का लालच देकर हमारे बीच फूट डाल दी जाती है और हमें एक नहीं होने दिया जाता। जब मजदूरों के बीच एकता नहीं रहती है तो कम्पनी मालिक इसका फायदा उठाकर हमसे कम समय में ज्यादा से ज्यादा काम करवाता है। जो मजदूर अपने अधिकारों के बारे में जानते हैं और ज्यादा काम करने से मना कर देते हैं, उनको डराया–धमकाया जाता है और कहा जाता है कि अगर नहीं करेगा तो कम्पनी से निकाल दिया जायेगा। कम समय में ज्यादा काम और जबरदस्ती ओवर टाइम करवाया जाता है। जबरदस्ती 12–14 घण्टे काम करवाया जाता है। हम मजदूरों की हालात खराब क्यों न हो जाये, काम करते–करते चक्कर आ जाये, चोट लग जाये तो कम्पनी मालिक और उसके चमचों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि वे मजदूरों को गधा समझते हैं और उन्हें सिर्फ अपने मुनाफे की चिन्ता रहती है, चाहे मजदूर की जान चली जाये।
कम्पनी के अन्दर हम अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते। हमें शौचालय या पानी पीने के लिए भी नहीं जाने दिया जाता। खराब खाना और गन्दे पानी की वजह से हमारा पेट खराब रहता है और बार–बार शौचालय जाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन नहीं जाने दिया जाता। हमसे बोला जाता है कि लंच में जाना जो सिर्फ 20 मिनट का होता है या टी ब्रेक में जाना या फिर 12 घण्टे में सिर्फ तीन बार जा सकते हो। इसके चलते महिला मजदूरों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
काम करते समय कन्वेयर बेल्ट की स्पीड बढ़ा दी जाती है और उस पर अधिक माल लादकर जल्दी–जल्दी काम करवाया जाता है। प्रतिदिन टारगेट दिया जाता है। इससे आये दिन मजदूरों के साथ दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। जैसे कन्वेयर बेल्ट की स्पीड ज्यादा होने की वजह से मजदूरों को उसी स्पीड में पूरे शरीर को चलाना पड़ता है। कई बार मजदूर चक्कर खा कर गिर जाते हैं। इस पर पास में खड़े लाइन इन्चार्ज, सुपरवाइजर और प्लाण्ट हेड हँसते है और मजदूरों का मजाक उड़ाते हैं। जब महिला मजदूर असहनीय स्पीड में काम करते–करते बेहोश हो जाती हैं तो उन्हें बोला जाता है कि नाटक कर रही है। खराब मशीन चलाते समय मजदूरों के साथ कई बार दुर्घटना हुई है।
मैं जिस कम्पनी में काम करता हूँ वहाँ एक खराब मशीन पर हमसे जबरदस्ती काम करवाया गया, जबकि मशीन खराब होने की जानकारी हमने लाइन इन्चार्ज, सुपरवाइजर, प्लाण्ट हेड और एचआर को दे दी थी और काम करने से मना कर दिया था। लेकिन थोड़े से लालच और कम्पनी के मालिक का मुनाफा कम न हो, इस चक्कर में न तो मशीन को ठीक करवाया गया और न ही बदला गया। इस मशीन पर काम करते हुए 4 महीने में 6 मजदूरों को गम्भीर चोट लगी है जिनमें मैं भी शामिल हूँ। एक मजदूर साथी की उँगली कट कर मशीन में ही गिर गयी, 5 साथी मजदूरों की उँगली छित गयी या फिर टेढ़ी हो गयी है।
मुझे श्रम कानून और मजदूरों के अधिकारों के बारे में थोड़ी–बहुत जानकारी है जो मजदूर पत्रिका पढ़कर मुझे हासिल हुई। चोट लगने के बाद मैंने कम्पनी के अधिकारियों से लगातार लड़ाई लड़ी। उनसे माँग की कि जब तक मैं पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता तब तक छुट्टी दी जाये और उतने दिन का वेतन भी दिया जाये तथा मुआवजे की और साथ ही इएसआई में मुआवजे के लिए अप्लाई किया। मुझे अपने हक की लड़ाई में सफलता मिली और मुआवजा भी मिला। लेकिन मेरे 5 साथियों को धमकाकर भगा दिया गया क्योंकि उनको अपने अधिकारों और श्रम कानूनों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मैंने अपने साथियों की मदद करनी चाही तो कम्पनी मैनेजर ने मुझसे कहा कि तुम उन लोगों का साथ मत देना वरना तुम्हें कम्पनी से निकाल दिया जायेगा। मैंने निडर होकर कहा कि मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फिर वह मुझे लालच देने लगा कि तुम्हें कम काम दिया जायेगा। मैंने उससे पूछा कि क्या इस लालच से मेरे साथियों की उँगली वापस आ सकती है। उसने कोई जवाब नहीं दिया।
आज मैं अपने मजदूर साथियों के साथ जी–जान से खड़ा हूँ और उन्हें बोलता हूँ कि अपने हक के लिए लड़ें और श्रम कानूनों के बारे में जानें। हम सभी को एकजुट होकर अपने हक के लिए लड़ना चाहिए। यह सब मैंने मजदूर पत्रिका के साथियों से सीखा है। जो हमें लगातार मजदूर वर्ग के अधिकारों के प्रति जागरूक होने, शिक्षित होने, एकजुट होने और संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं।
–– अर्सलान