लौह पटरियों की अनसुनी धुन

08 Jun 2025 • फासीवादी हमलों के खिलाफ संघर्ष के लिए आगे आओ!
लौह पटरियों की संगीतमय धुन राष्ट्र ने अभी तक नहीं सुनी नहीं सुने गये हैं वे तराने जो जन्मते हैं उस समय जब देश के मेहनतकश–सपूत दूर तलक फैली धरती पर बिछाते हैं लोहे की गर्म–गहरी नसें जिसमें राष्ट्र का लहू बहता है।   मैं वह गीत सुनाता हूँ उन पटरियों के लयबद्ध तराने जो कभी सोते नहीं, और सुनाता हूँ ट्रैकमैन की कहानी, जिनकी कर्मठता और गौरव के किस्से देश के कोने–कोने में बिखरे हुए हैं कि शायद उन्हें एक दिन संजोया जाये। वे उठाते हैं हाथ हथौड़े और छेनी के साथ, अपनी पकड़ में ताकत लिये, वे तपते जिस्म और फौलादी दिल से नियति को बदल रहे हैं, खुले आसमान के नीचे, उनका मंच इतना विशाल है, समय और ज्वार के खिलाफ जाकर, जिस पर वे अभिनय करते हैं।   जलती धूप, आँधी, ओलावृष्टि और तूफान उनके चेहरों को झुलसा रहे हैं, उनकी आँखें, यातायात–साधन की अथक प्रहरी हैं, वे हाड़तोड़ मेहनत करते हैं, क्योंकि वे पटरियों के संरक्षक हैं। रात के अँधेरे में या चिलचिलाती धूप में, उनकी आत्मा कभी डगमगाती नहीं, उनका संकल्प कभी डिगता नहीं, वे टूटे हुए को जोड़ते हैं, उबड़–खाबड़ को चिकना करते हैं, ताकि रेलगाड़ियाँ बिना झुके, बिना पलटे, चलती रहें अनवरत।   उनके तराने, रेलगाड़ी की छुकछुक–छकछक में गूँजते हैं, उनके पदचिन्ह, घन–चोट के कोरस में अंकित हैं, ट्रैकमैन की खामोश मेहनत और फुसफुसाती दिलफरेब बातें मन को मोह लेती हैं धुँधली सुबहों और मानसून की फुहारों के बीच, वे पटरियों पर पहरा देते हैं, जिससे आप और हम यात्रा कर सकें, दुख–सुख और उल्लास की धरती पर हमारी यात्राएँ, उनके खून–पसीने से सुरक्षित हैं।   वे अनगिनत गुमनाम नायक हैं, राष्ट्र की प्रेरक–शक्ति हैं, उनका साहस, एक चिरस्थायी प्रकाश स्तम्भ है, उनकी ताकत, लड़ाई का सार है, कँपकँपाती शरद चाँदनी में या आग उगलते आसमान के नीचे वे कभी आह नहीं भरते, लेकिन उनके साथ बड़ा दुर्व्यवहार है वे मुफलिसी में जीने को लाचार हैं। श्रद्धांजलि, उन राष्ट्र नायकों को, जो ट्रैक की मरम्मत में खप गये धरती माँ की गोद में सदा–सदा के लिए सो गये उनकी वीरता चमकती रहेगी इतिहास के पन्नों पर, हम उन्हें अन्तिम विदाई देते हैं। और संकल्प लेते हैं कुर्बानी तुम्हारी न जाया होने देंगे जो दोषी हैं उनसे पूरा हिसाब लेंगे।   सादगी और विनम्रता ट्रैकमैन का आभूषण है ये कमजोरी का संकेत नहीं जो कठोर हाथ देश के सीने में पिघला हुआ लोहा उतार सकते हैं वे उनका गुरूर भी तोड़ सकते हैं जो आज सत्ता के नशे में चूर हैं ट्रैकमैन का अतीत और उनका वर्तमान मेहनतकश की रक्षा का उनका संकल्प, कभी भुलाया न जा सकेगा, उनके संघर्षों को कभी मिटाया न जा सकेगा उनकी विरासत अमर रहेगी।   जय हो! हिन्द के निर्माता, मेहनतकशों की हम जयकार करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि वे संषर्घ पथ पर आगे बढ़ते जायेंगे अपनी एकता और वीरता से, भय पर विजय प्राप्त करेंगे, हथौड़े की चोट और अपने संकल्प से, धरती का कायाकल्प कर देंगे वह दिन जरूर आएगा जब गुलामी की बेड़ियों को काट फेंकेंगे। –– विक्रम प्रताप  
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