मजदूरों से जुड़े समाचार (अक्टूबर 2022)
महामारी के आड़ में भाजपा सरकार ने बहुत ही जल्दबाजी में मजदूर विरोधी नया लेबर कोड बिल लागू कर दिया। हर मालिक मुनाफा कमाने की होड़ में मजदूर को निचोड़ने के लिए तैयार है। पिछले सालों से मालिक की मुनाफे की हवस कुछ इस तरह बढ़ती चली जा रही है कि मालिक खराब से खराब मशीन, जिसे समय रहते बदल देना चाहिए उसे किसी हादसे के बाद बदले जाने का इन्तजार करता है, जिसके चलते कम्पनी, फैक्ट्रियों में होने वाले हादसे दिन–ब–दिन बढ़ते जा रहे हैं।
(1) दुर्घटनाएँ
पिछले पाँच सालों में दुर्घटनाओं में लगभग 6500 मजदूर अपनी जान गवाँ चुके हैं यानी हर दिन 4 मजदूर दुर्घटनाओं के शिकार होकर अपनी जान गवाँ रहे हैं। फिर भी आलम यह है कि किसी भी अफसर, नेता या मालिक कि सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। दुर्घनाओं को रोकने कि बात तो दूर सरकार कम्पनी लगाने कि शर्तों में ढील देती जा रही हैं। मामले अक्सर अखबारों में छपते ही नहीं और छपते भी हैं तो अखबार के किसी कोने में छपते हैं ताकि किसी की नजर न जाए। यहाँ तक की अखबार और टीवी वाले कैसे मजदूरों का पक्ष लेंगे, जब वे खुद मजदूर से नफरत करते हैं, तो वे उनकी बात कैसे रखेंगे?
हत्यारी सार्वजनिक कम्पनी इफको का बॉयलर फटा
इसी साल 23 मार्च 2021 को इफको के कारखाने में बॉयलर के फटने के चलते 12 से अधिक मजदूर बेरहमी से मार दिये गये। जबकि 18 से 20 मजदूर जख्मी हुए हैं। इफको का यह कारखाना इलाहाबाद के फूलपुर में स्थित है। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने मजदूरों को हॉस्पिटल ले जाने, उन्हें घटना स्थल से सुरक्षित निकालने, उनका इलाज करने, मजदूरों के परिवारों पर अचानक से पड़ी आपदा के माहौल में सांत्वना देने के बजाय सबसे पहले घटना स्थल पर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी और उसके बाद ही कुछ देर में इलाके की इंटरनेट सेवा बन्द कर दी ताकि लोगों के अन्दर इस घटना को लेकर गुस्सा न पैदा हो जाये।
इससे पहले 22 दिसम्बर 2020 को यूरिया प्लांट की वॉल फटने से अमोनिया गैस के रिसाव के चलते 2 अधिकारियों की मौत और 14 मजदूर बुरी तरह बीमार हो गये थे। उसके बाद भी प्लांट को अतिरिक्त लोड पर चलाया जाता रहा। इफको एक सार्वजनिक कम्पनी है और इस कम्पनी में बेहद कम सेलरी पर भारी संख्या में ठेका मजदूर रखे जाते हैं। इन ठेका मजदूरों से ज्यादा काम लिया जाता है। इसलिए जब भी कोई घटना होती है तो सरकार जाँच करने के बजाय मामले को रफा–दफा कर देती है। अगर सरकार और मैनेजमेंट का घटनाओं के प्रति यही रवैया रहा तो किसी दिन भोपाल गैस काण्ड जैसा हादसा हो सकता है।
इसी तरह सोनभद्र जिले के निजी थर्मल पवार प्लांट एलएएनसीओ की एक इकाई में मेंटीनेंस के दौरान एक बॉयलर से टिन शेड गिरने के चलते 13 मजदूर जख्मी हो गये और सरकार ने सिर्फ आश्वासन से काम चला लिया।
पटाखा फैक्ट्री या मौत का कारखाना
एक अप्रैल 2021 को मुरादाबाद जिले की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से 7 मजदूर बुरी तरह झुलस गये, जबकि 2 मजदूर जिन्दगी और मौत से लड़ रहे हैं। आये दिन फैक्ट्रियों में विस्फोट की घटनाएँ सुनने को मिलती रहती हैं। 8 अप्रैल को बिजनौर की एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के चलते 5 मजदूर जिन्दा जल गये और 4 मजदूर बुरी तरह झुलस गये। कुछ मूलभूत सुरक्षा उपकरणों की मदद से इन्हे रोका जा सकता है, लेकिन भ्रष्ट नेता और अफसरों की मिलीभगत के चलते इन कम्पनियों को रिश्वत के दम पर लाइसेन्स मिल जाता है, बिना किसी मानक पर और सुरक्षा उपकरणों की जाँच के। उसका भुगतान मजदूरों को अपनी जान चुका कर या फिर जिन्दगी भर अपाहिज बन कर चुकाना पड़ता है।
फरीदाबाद में मजदूरों के 300 घरों को मिट्टी में मिलाया
2 अप्रैल 2021 को नगर निगम ने बिना नोटिस दिये ही फरीदाबाद के खोरी गाँव की मजदूर बस्ती के 300 घरों पर बुलडोजर चलवा दिया। महिलाएँ, बच्चे, बूढ़े गुहार लगते रहे कि उनके घर न गिराये जाएँ, लेकिन नगर निगम के कर्मचारियों के कानों पर कोई जूँ नहीं रेंगी। भारी संख्या में पुलिस फोर्स और 9 बुलडोजरों से उनके बसे बसाये घर के साथ उनके अरमानों को भी उजाड़ दिया। अब ये मजदूर कहाँ जाएँ? उनके बच्चे कहाँ रहेंगे? कैसे वह अपना गुजारा करेंगे? उनके बीमार बुजुर्ग कहाँ जाएँगे?
(2) बढ़ता मजदूर आन्दोलन
सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान मजदूरों की रोजी–रोटी की गारंटी करना तो दूर उल्टे महामारी के नाम पर मजदूरों के हित में बने श्रम कानूनों को ही रद्द कर दिया। इसका फायदा उठाते हुये ज्यादातर कम्पनियों ने मजदूर को मिलने वाली नाम मात्र की रियायतों में भी कटौती कर दी। वेतन घटा दिया गया, मनमाने तरीके से छँटनी जारी है। यही कारण है जिसके चलते अब मजदूर हड़तालों पर जाने लगे हैं।
हरियाणा की कम्पनियों में मजदूरों का उभरता असंतोष
पिछले एक महीने के अन्दर ही हरियाणा के तीन ऑटो पार्ट मेकर्स कम्पनियों के मजदूरों में असंतोष उभरकर सतह पर आ गया है। काम करने वाले मजदूर हड़ताल पर बैठे हैं। 15 फरवरी 2021 को बावल केहिन फाई कम्पनी की महिला मजदूर और मनेसार स्थित सत्यम ऑटो के मजदूर और 8 मार्च महिला दिवस पर जेएनएस के मजदूर हड़ताल पर चले गये।
उत्तराखण्ड के वोल्टास लिमिटेड में हड़ताल
उत्तराखण्ड के पंतनगर के सिडकुल स्थित वोल्टास लिमिटेड कम्पनी के मजदूर कम्पनी के बाहर ही 6 अप्रैल 2021 से धरने पर बैठे हैं। इनका कहना है कि कम्पनी में मजदूरों का शोषण बहुत बढ़ गया है। मजदूरों की समस्या हल करने के लिए बनायी गयी कमेटी अपने वादों से मुकर गयी है और मालिक भी बेखौफ हो गया है। यूनियन ने कहा कि कम्पनी गैर कानूनी रूप से ठेका और नीम ट्रेनी मजदूरों से उत्पादन करा रही है। यूनियन का यह भी कहना है कि जिन मजदूरों का केस यूनियन ने जीत लिया है, कम्पनी उनकी भी बहाली नहीं कर रही है।