निवाला

09 Jul 2024 • फासीवादी हमलों के खिलाफ संघर्ष के लिए आगे आओ!

माँ है रेशम के कारखाने में

बाप मसरूफ सूती मिल में है

कोख से माँ की जब से निकला है

बच्चा खोली के काले दिल में है

जब यहाँ से निकल के जाएगा

कारखानों के काम आयेगा

अपने मजबूर पेट की खातिर

भूक सरमाये की बढ़ाएगा

हाथ सोने के फूल उगलेंगे

जिस्म चाँदी का धन लुटाएगा

खिड़कियाँ होंगी बैंक की रौशन

खून इसका दीये जलायेगा

यह जो नन्हा है भोला–भाला है

खूनीं सरमाये का निवाला है

पूछती है यह इसकी खामोशी

कोई मुझको बचाने वाला है!

–– अली सरदार जाफरी

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