भूखों की रोटी हड़प ली गयी है

01 Oct 2022 • मजदूर एकता पुस्तिका- ४ • 4 बार पढ़ा गया

भूखों की रोटी हड़प ली गयी है

 

भूखों की रोटी हड़प ली गयी है

भूल चुका है आदमी मांस की शिनाख्त

व्यर्थ ही भुला दिया गया है जनता का पसीना।

जय पत्रों के कुंज हो चुके हैं साफ।

गोला बारूद के कारखानों की चिमनियों से

उठता है धुआँ।

–– बर्तोल्त ब्रेख्त

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