बेहतर है एक विरोधी का जीवन

01 Feb 2022 • मजदूर एकता पुस्तिका- ३ • 4 बार पढ़ा गया

तुम्हारी सड़ी–गली व्यवस्था का पुर्जा बनने से

बेहतर है उसके विरोध में आवाज उठाना

तुम्हारी तानाशाही को सहने से

बेहतर है तुम्हें सत्ता से बेदखल करना

तुम्हारे टुकड़ों पर पलने से

बेहतर है लड़कर अपना हक लेना

तुम्हारे रहमो–करम पर जिन्दा रहने से

बेहतर है अपने बाजुओं पर भरोसा करना

तुम्हारी सेवा से बेहतर है

जनता के सुख–दुख में

और उसके संघर्षों में भागी होना

तुम्हारे तमगे बटोरने से अच्छा है

नये समाज के निर्माण के लिए काम करना

गुलाम की जिन्दगी से बेहतर है

एक विरोधी का जीवन।

–– दीपक कुमार

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