भूखों की रोटी हड़प ली गयी है भूल चुका है आदमी मांस की शिनाख्त व्यर्थ ही भुला दिया गया है जनता का पसीना। जय पत्रों के कुंज हो चुके हैं साफ। गोला बारूद के कारखानों की चिमनियों से उठता है धुआँ। –– ......
आज से लगभग सौ साल पहले, 1926 में खड़गपुर के रेलवे मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए एक शानदार संघर्ष किया था। उनके इस संघर्ष ने पूरी दुनिया को बता दिया था कि भारत का मजदूर वर्ग एक बड़ी ताकत बन चुका है औ......
आपने बच्चों को बॉल (गेंद) से तो खेलते देखा ही होगा, वे या तो क्रिकेट की या फिर टेनिस की बॉल से खेलते हैं। टेनिस की बाल से खेलकर कई खिलाड़ी अपने साथ ही देश का भी नाम रोशन करते हैं। उनके मैच को देखते हु......
मैनेजमेंट की गलती के कारण एक मजदूर की कुचल कर मौत बीते दिनों रेवाड़ी जिले के बावल औद्योगिक इलाके में स्थित रीको कम्पनी में सत्येन्द्र सिंह नाम के ठेका मजदूर की दर्दनाक मौत हुई। इस कम्पनी में एक हजार ......
मजदूरों के लिए फैक्ट्री में काम करना बेहद खतरनाक होता जा रहा है। देश भर में फैक्ट्रियों में होने वाली दुर्घटनाएँ इस बात की गवाह हैं। इन दुर्घटनाओं में मजदूर घायल हो जाते हैं, या अपना कोई अंग खो बैठते ......
जेराशिम ऐसे समय मास्को शहर में लौटकर आया जब कोई नौकरी मिलना बहुत कठिन था। क्रिसमस–त्योहार का केवल एक महीना रह गया था। इस समय कुछ इनाम पाने की उम्मीद से सब अपनी–अपनी नौकरी पर लगे रहते हैं, चाहे वह नौकर......
पिछले लेख में हमने देखा कि अगर मजदूर वर्ग अपनी गुलामी से छुटकारा पाना चाहता है तो इस अन्यायपूर्ण पूँजीवादी व्यवस्था को बदलकर एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना करना लाजिमी है। इस काम के लिए हर मजदूर का......
हम जानते हैं कि दुनिया भर की सारी निर्मित सम्पत्ति जैसे–– मकान, कपड़ा, घर के सारे सामान, आदि उन्हें मजदूरों ने ही बनाया है। जिस सड़क पर हम चलते हैं, जो सामान दुकानों में बिकते हैं, सभी को मजदूरों ने ह......
ब्रांडेड कपड़ों, जूतों आदि के दाम हमें चैंका देते हैं। हमारा मकसद इन ब्रांडेड चीजों के दामों की लिस्ट बताना नहीं है। फिर भी क्या आपने कभी 5 लाख 24 हजार रुपये की जिन्स या 2 लाख 19 हजार रुपये की जैकेट य......
दुनिया को बदलने के लिए, सबसे पहले हमारे पास उस दुनिया के बारे में कम से कम एक सामान्य विचार होना जरूरी है, जिसमें हम जीना चाहते हैं, और दूसरा, हमें यह जानने की जरूरत है कि ऐसी दुनिया को अस्तित्व में क......
‘ओ साहिब जी, एक भूखे बेचारे पर दया कीजिए। तीन दिन का भूखा हूँ। रात बिताने के लिए जेब में एक पैसा भी नहीं। पूरे आठ साल तक गाँव के एक स्कूल में मास्टर रहा। बड़े लोगों की बदमाशी से नौकरी चली गयी। जुल्म क......
लकड़ी की चम्मच का इस्तेमाल हर किसी ने किया होगा, जैसे शादी–विवाह में चाट, रसगुल्ले खाने के लिए। हम इन चम्मचों का एक बार उपयोग करके कूड़ेदान में डाल देते हैं। कूड़ेदान में जाते ही इन चम्मचों की कहानी क......
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