इस अंक के लेख

मजदूर आन्दोलन

आशा वर्करों से गुफ्तगू

हमने तीन आशा वर्करों––रज्जो, रोशनी और सीता से बातचीत की जो मेरठ के प्यारेलाल अस्पताल में काम करती हैं। इन सबसे बात करके हमें अच्छा लगा क्योंकि वे खुशमिजाज और निडर हैं। वे बहुत मेहनती भी हैं। रज्जो और सीता की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। इनके पति मजदूरी करते हैं, जबकि रोशनी की आर्थिक हालत थोड़ी ठीक है। उसके पति की प्रिंटिंग की दुकान है। इन तीनों में अच्छी यारी–दोस्ती है। उनके काम और समस्याओं आदि से सम्बन्धित जो बातचीत हमने की उसका कुछ हिस्सा हम यहाँ दे रहे हैं।...

कहानी

कहानी: कचरा बाबा

जब वो अस्पताल से बाहर निकला तो उसकी टांगें काँप रही थीं और उसका सारा जिस्म भीगी हुई रुई का बना मालूम होता था। और उसका जी चलने को नहीं चाहता था, वहीं फुटपाथ पर बैठ जाने को चाहता था। कायदे से उसे अभी एक माह और अस्पताल में रहना चाहिए था, मगर अस्पताल वालों ने उसकी छुट्टी कर दी थी। साढे़ चार माह तक वो अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में रहा था और डेढ़ माह तक जनरल वार्ड में, इस दरमियान उसका गुर्दा निकाल दिया गया था और उसकी आँतों का एक हिस्सा काट के आँतों की बीमारी को दुरुस्त किया गया था। अभी तक उसके कलेजे की बीमारी सही नहीं हुई थी। उसे अस्पताल से निकल जाना पड़ा। क्योंकि दूसरे लोग इन्तजार कर रहे थे, जिनकी हालत उस से भी बदतर थी। डॉक्टर ने उसके हाथ में एक लम्बा सा नुस्खा दे दिया और कहा––...

मजदूर इंटरव्यू

झोला बनाने वाली महिलाओं से बातचीत

हमारे घरों में कपड़े के थैलों में कोई न कोई सामान आता ही रहता है। कभी पोशाक तो कभी मिठाइयाँ। इन कपड़ों के झोलों का चलन बढ़ता जा रहा है। हमारे मन में शायद ही कभी ख्याल आता है कि इन झोलों को बनाने वालों की जिन्दगी कैसी होगी। इसे जानने के लिए हम उन महिलाओं के बीच गये जो झोला बनाती हैं। हमें उनको करीब से जानने का मौका मिला।...

कॉर्पोरेट

कम्पनी में काम का मेरा अनुभव

मजदूरों पर अत्याचार हो रहे है और मजदूरों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। मैं खुद भी एक आम मजदूर हूँ और उत्तराखण्ड के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में एक प्राइवेट कम्पनी में ठेकेदार के नीचे काम करता हूँ। हम अपनी औकात से अधिक काम करते हैं फिर भी हमारे साथ हमारे ही सीनियर, कम्पनी में ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों और कम्पनी मालिक द्वारा अत्याचार किया जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि शिक्षित होकर के भी हम श्रम कानूनों और अपने अधिकारों के बारे में नहीं जानते हैं। यह बहुत दुर्भाग्य की बात है।...

दुर्घटना

फैक्ट्रियों की आग में झुलस कर मरते मजदूर

बीती 4 जनवरी को तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के सत्तूर इलाके में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट की दिल दहलाने देने वाली घटना सामने आयी। इस धमाके में फैक्ट्री का एक कमरा पूरी तरह से तबाह हो गया जिसमें कई ......

कॉर्पोरेट

कामकाजी जनता पर पर्यावरण प्रदूषण की मार

अखबार, टीवी और तमाम सूचना माध्यम से यह बात जगजाहिर है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के पैमाने के 60 गुणा से भी ज्यादा खराब है। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले परिवारों में से 75 प्रतिशत परिवारों में किसी न किसी को गले में सूजन या खाँसी की शिकायत है। 58 प्रतिशत परिवारों में सरदर्द के मरीज हैं और 50 प्रतिशत परिवारों में दमा या दूसरे साँस सम्बन्धी बीमारी के मरीज हैं। खराब हवा के चलते जब दिल्ली सरकार और केन्द्रीय सरकार स्कूल और सरकारी दफ्रतर तथा बहुत से निजी कम्पनी के कर्मचारियों के लिए छुट्टी या घर काम करने की इजाजत दे रही है तब बहुत जरूरी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर बाहर निकलने को मजबूर हैं।...

उत्तरदायित्व

मजदूर किसे अपना संगठन मानें?

देशभर में कुकुरमुत्ते की तरह तमाम संगठन उग आये हैं, जिन्हें देखकर किसी भी मजदूर का सिर चकराने लगता है। उसके सामने सवाल उठता है कि हम किस संगठन को अपना मानें? हम किस संगठन की मदद करें और किससे हमारा फा......

इतिहास

अगस्त क्रान्ति की अमर कहानी

 “अगस्त क्रान्ति” मेहनतकश जनता के संघर्षों की वीर गाथा है। एक ऐसा विद्रोह जिसने अंग्रेजों को ही नहीं बल्कि अत्याचारी जमींदारों, राजाओं और कारखाना मालिकों को नाकों चने चबाने के लिए मजबूर कर दिया। ......

चार श्रम संहिता

मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं का विरोध क्यों करें?

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उद्योगपतियों के संगठन फिक्की ने मुख्य चुनावी पार्टियों के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि श्रम कानूनों को लचीला किया जाये। उनकी मंशा साफ थी कि मजदूरों की सहुलियतों में भारी क......

भूमिका

कोरोना महामारी के समय मजदूरों के हकों पर हमला

कोरोना महामारी का बहाना बनाकर देश के कई राज्यों ने श्रम कानूनों में बदलाव करके मजदूरों पर हमला बोल दिया गया है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार सबसे आगे है। योगी सरकार ने 38 श्रम कानूनों में से लगभग 35 श्रम ......

कविता

निवाला

माँ है रेशम के कारखाने में बाप मसरूफ सूती मिल में है कोख से माँ की जब से निकला है बच्चा खोली के काले दिल में है जब यहाँ से निकल के जाएगा कारखानों के काम आयेगा अपने मजबूर पेट की खातिर भूक सरमाये......

अंधविश्वास और तर्कशीलता

अंधविश्वास छोड़ वैज्ञानिक नजरिया अपनाओ

मथुरा के पास एक गाँव है–– ऊँचा खेड़ा। वहाँ एक ‘श्याम बाबा’ आसपास के इलाके में अचानक मशहूर हो गये। मशहूर होने की वजह थी एक अफवाह। हुआ कुछ यूँ कि एक खबर उड़ी कि श्याम बाबा का नियमित व्रत रखने और सुबह–सु......

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