55 साल के प्रदीप (बदला हुआ नाम) ने सातवीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है। कम उम्र से ही मजदूरी करने के कारण आगे पढ़ाई नहीं कर पाये। हिन्दी पढ़ लेते हैं। इनका पूरा जीवन मुख्यत: खेत मजदूर का रहा ......
मजदूर सहायक समिति (एमएसएस) के कुछ साथियों ने मेरठ की बुक बाइंडिंग की फैक्ट्री के मजदूरों का सर्वे किया। इस सर्वे में उनके कार्यस्थल, जीवन दशा और निवास स्थल के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें पता चलीं। उस......
किसानों–मजदूरों में दो तरह की शिक्षा की जरूरत है–– छोटे बच्चों के लिए और प्रौढ़ व्यक्तियों के लिए। इस लेख में छोटे बच्चों की शिक्षा के बारे में बात की जायेगी। बच्चों की बुनियादी शिक्षा (बेसिक एजुकेशन)......
जंत्र–मंत्र सब झूठ है, मत भरमो जग कोय। सार शब्द जानै बिना, कागा हंस न होय। –कबीर कबीर दास ने बहुत पहले ही टोने–टोटके ......
एक गुलाम हमेशा लोगों का इन्तजार करता रहता था, जिससे उनके सामने अपना दुखड़ा रो सके। वह बस ऐसा ही था और बस इतना ही कर सकता था। एक दिन वह एक अक्लमन्द आदमी से मिला। ‘‘श्रीमान!” वह उदास स्वर में रोते हुए ......
पिछले साल लॉक डाउन के दौरान एक महिला मजदूर जो अपने गाँव वापस लौटने को अकेले ही निकल पड़ी, 300 किमी चलने के बाद उसकी हालत गम्भीर हो गयी और उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उसी दौरान अपने घर बिहार वापस ज......
कोरोना महामारी का कहर अभी खत्म नहीं हुआ है। कोरोना फैलने के तुरन्त बाद से दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने इसे जानने–समझने का प्रयास शुरू कर दिया। तमाम प्रयोगों के बाद कुछ सफलता हासिल हुई। आज कोरोना महामारी......
मेरठ में मलियाना के उत्तरी इलाके में ज्यादातर मजदूर अस्थाई और खुली मजदूरी करते हैं। यह मुख्य सड़क से 200–300 मीटर अन्दर की ओर है। रेलवे स्टेशन यहाँ से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ के रास्ते......
(अक्सर किसी कारखाने या दफ्तर में काम करने वाले मजदूर से बात करो तो वे यह कहते हैं कि उन्हें काम देकर उनका मालिक उन पर कृपा करता है, क्योंकि अगर उन्हें काम न मिले तो उनका जीना मुश्किल हो जायेगा। समाज म......
कोरोना महामारी ने मजदूरों के सामने दोहरा संकट पैदा कर दिया है। एक तरफ तो कोरोना वायरस से जान का खतरा, वहीं दूसरी ओर रोजी–रोटी का संकट। पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान देश में लगे लॉकडाउन ने मजदूरों ......
आज शहरों में बड़े प्राइवेट अस्पताल हैं जिसमें हजारों की फीस देकर इलाज करा पाना मजदूरों के लिये सम्भव नहीं है। आज प्राइवेट मॉडल पर आधारित चिकित्सा मजदूरों की पहुँच से दूर होती जा रही है। कई शहरों में स......
ट्रेड यूनियन यानी श्रमिक संघ मजदूरों का संगठन है। ढेर सारे मजदूर आपस में मिलकर ट्रेड यूनियन बनाते हैं, जिससे वे एकजुट होकर अपने हक के लिए लड़ सकें। अगर मजदूर ट्रेड यूनियन में शामिल नहीं होते तो उनकी ए......
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