सन्त कबीर को कौन नहीं जानता? कबीर मेहनत–मजदूरी करके जिन्दगी बिताने वाले इनसान थे। वे कपड़े की बुनाई किया करते थे। समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए अपने पद और दोहे लोगों को सुनाया करते थे। वे हमें प्रेरणा देते हैं कि हम मालिक की गुलामी से आजाद हो जायें। वे खुद स्वीकार करते हैं कि उनके विचार इनसान की स्वतंत्रता के लिए जरूरी हैं।...
गाँव के एक छोर पर जोहड़ के किनारे बसे मुस्लिम और दलित मजदूरों के मोहल्ले में हमारे चाचा और दोस्त रोजूदीन का घर है। चाचा अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन परिवार के साथ आज भी हमारा रिश्ता उतना ही गहरा है। चाचा नयी सोच के मजदूर थे, किताबें पढ़ते थे और हमने उनके घर में आम परिवारों की तरह औरतों को परदे में छिपे हुए नहीं देखा। उनका घर एक बन्द गली के छोर पर है। गली इतनी संकरी है कि.......
पिछले तीस साल के दौरान महिला मजदूर नयी गुलामी की चक्की में पिसती रहीं। उनकी हालत लगातार खराब होती गयी है। उनका शोषण–उत्पीड़न भी लगातार बढ़ता गया है। जहाँ पहले महिलाओं को सम्पत्ति के अधिकार से, उत्पादन......
मैं एक मजदूर हूँ और ‘मजदूर सहायता समिति’ से जुड़ा हूँ। हमारी समिति मजदूरों की राजनीतिक चेतना बढ़ाने पर बहुत जोर देती है। एक प्लांट में काम करने वाले अपने मजदूर दोस्तों के साथ बातचीत में मैंने खुद इस जरूरत को बहुत शिद्दत से महसूस किया है। अपने उसी अनुभव को आपके साथ साझा कर रहा हूँ।...
1990 में नवउदारवादी नीतियों में उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण को लागू करने का मकसद था–– देश को फिर एक बार गुलामी की बेड़ियों में जकड़ देना, मजदूरों और किसानों के निर्मम शोषण का रास्ता साफ करना और देशी–विदेशी पूँजीपतियों–धन्ना सेठों की दिल खोलकर मदद करना। अमरीका के द्वारा आईएमएफ, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन के जरिये लागू इन नीतियों ने पिछले 30 सालों में देश के मजदूरों को गरीबी में धकेल दिया, नौजवानों को बेरोजगार कर दिया और किसानों को कर्ज के जाल में फँसा दिया। अपनी बदहाल हालत के प्रति मजदूर, किसान और नौजवान जागरूक न हो जायें, इसके लिए इन नीतियों के साथ साम्प्रदायिक और धार्मिक राजनीति को बढ़ावा दिया गया। शासक वर्ग ने जनता को मन्दिर–मस्जिद और हिन्दू–मुस्लिम के दंगों में उलझा दिया।...
अपनी अनुयायी दो लड़कियों के साथ बलात्कार के आरोपी, पहले से ही जेल में बन्द, ‘डॉ सन्त गुरमीत सिंह राम रहीम इंसान’ को एक पत्रकार को मारने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी। 16 साल पहले पत्रकार......
तुम्हारी सड़ी–गली व्यवस्था का पुर्जा बनने से बेहतर है उसके विरोध में आवाज उठाना तुम्हारी तानाशाही को सहने से बेहतर है तुम्हें सत्ता से बेदखल करना तुम्हारे टुकड़ों पर पलने से बेहतर है लड़कर अपना ह......
कुछ साल पहले मेघालय की 370 फीट गहरी एक सँकरी कोयला खदान में 15 मजदूर फँस गये। उन्हें बचाने के लिए चले बचाव अभियान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस बचाव अभियान के दौरान आधुनिक उपकरणों के अभाव......
आज से लगभग 15 साल पहले एक मजदूर परिवार मेरठ के गाँव नारंगपुर जाठोला से मलियाना में आकर बस गया था। गाँव के आर्थिक और सामाजिक परिवेश ने इस परिवार को जड़ से उखाड़ दिया। गाँव में खेती न होने और रोजी–रोटी ......
मजदूर एकता पुस्तिका के दूसरे अंक में मलियाना के उत्तरी इलाके में गिल्ली ठोकनेवाले मजदूरों का सर्वे छपा था। उस दौरान हमें कुछ ऐसे काम की भी जानकारी मिली जो इस इलाके की महिलाएँ करती हैं, उनमें आलू गोदाम......
मौत के मुँह में समाते सीवर सफाई कर्मचारी सीवर साफ करते हुए अक्सर किसी न किसी सफाई कर्मचारी की मौत की खबर आज आम हो चली हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी मौतों के बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम क्यों नही......
देशभर में कुकुरमुत्ते की तरह तमाम संगठन उग आये हैं, जिन्हें देखकर किसी भी मजदूर का सिर चकराने लगता है। उसके सामने सवाल उठता है कि हम किस संगठन को अपना मानें? हम किस संगठन की मदद करें और किससे हमारा फा......
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