समाज के शिक्षित लोगों में डॉक्टर, इंजीनियर, अध्यापक, सरकारी कर्मचारी, निजी कर्मचारी और दूसरे पढ़े–लिखे लोग आते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह शिक्षित तबका समाज का अगुआ है। समाज के बाकी लोगों को जागरूक कर......
कोरोना महामारी और उसके बाद मजदूर वर्ग और अन्य मेहनतकश जनता को भयावह दुख–तकलीफें झेलनी पड़ी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पिछले तीन सालों में देश में 5 लाख से अधिक लोेगों की कोविड महामारी से मौत हो......
आज मजदूर वर्ग अपने इतिहास के संघर्षों को भूलता जा रहा है। यही वजह है कि उसके लड़ने के जज्बे में कमी आयी है और उसकी एकता कमजोर पड़ गयी है। क्या अपने इतिहास से कटकर मजदूर वर्ग अपनी लड़ाई में जीत ह......
सितम्बर 2017 में तीन साथियों ने मिलकर शामली जिले के एक गाँव में ‘जनता पाठशाला’ की शुरुआत की थी। आज इस पाठशाला को 6 साल से ज्यादा हो गये हैं। इलाके के अनेक बच्चे इस पाठशाला में पढ़ चुके हैं। कुछ बच्चे ......
कर्मचारी अपने एकजुट संघर्ष के दम पर क्या कुछ हासिल कर सकते हैं, सीएचओ के एक संगठित आन्दोलन ने हाल ही में इसका एहसास करा दिया। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सीएचओ के आन्दोलन लगातार चल रहे हैं। उनकी माँग......
हजारों वर्षों से हम पत्थर काट रहे हैं महलों और गुम्बजों का निर्माण कर रहे हैं बिड़लाओं के भगवान गढ़ रहे हैं औजार हमारे हाथ हैं शोहरत और सुविधा उसके साथ हम पत्थर काट रहे हैं हम अन्धी गुफाओं क......
नौ साल की उम्र का वांका झुकोव तीन महीने से अल्याखिन मोची के पास काम सीख रहा था। क्रिसमस (ईसाइयों के सबसे बड़े त्योहार) की पहली रात्रि को वांका सोने नहीं गया। वह इन्तजार कर रहा था कि कब मालिक और मालकिन......
दो दिसम्बर 2024 को ‘मजदूर सहायता समिति’ और मासा के साथी हरियाणा के गुरुग्राम स्थित लघु सचिवालय मे ‘बेलसोनिका ऑटो कम्पोनेंट इंडिया कर्मचारी संघ’ के धरने को अपना समर्थन देने गये। उन्होंने धरने का कारण ज......
12 नवम्बर, दिवाली की रात। उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में चल रहे चारधाम सड़क परियोजना में सिलक्यारा से बड़कोट तक सुरंग बनाने के दौरान पहाड़ धँसने से 41 मजदूर सुरंग के अन्दर फँस गये। सरकार और प्रशासन ......
उत्पल दत्त एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने मजदूर वर्ग की सेवा में अपनी पूरी जिन्दगी लगा दी। वे चुप रहकर हालात का तमाशा देखनेवालों में से नहीं थे। उन्होंने विषम परिस्थितियों से घबराना नहीं सीखा था। जो स......
आज मजदूरों के हकों पर चौतरफा हमला किया जा रहा है। सरकार ने चार श्रम संहिता पास करके मजदूरों पर हमला बोल दिया है। वह मजदूरों से सभी सरकारी संरक्षण छीन लेने पर आमादा है। न्यूनतम वेतन, यूनियन गठन, कार्यस......
“हड़ताल कौन करेगा?, मैं करूँगा, हम करेंगे।” यह नारा 1974 के ऐतिहासिक आन्दोलन में मजदूरों ने बुलन्द किया था। इस नारे के साथ लाखों मजदूरों ने 20 दिन तक रेलवे की देशव्यापी हड़ताल की थी।.... केवल भारत ही नहीं दुनिया भर में इस आन्दोलन की गूँज सुनाई दी। कई देशों की मजदूर यूनियनों ने इस संघर्ष की प्रशंसा की।...
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