मजदूर एकता पुस्तिका के पहले अंक का हर जगह लोगों ने और खास तौर से मजदूरों ने स्वागत किया। इससे हमारा उत्साह बहुत बढ़ गया है। उनके बीच से कई तरह की बातें सामने आयीं। कुछ लोगों ने इससे पूरी सहमति जतायी औ......
चौधरी पीरबख्श के दादा चुंगी के महकमे में दारोगा थे। आमदनी अच्छी थी। एक छोटा, पर पक्का मकान भी उन्होंने बनवा लिया। लड़कों को पूरी तालीम दी। दोनों लड़के एण्ट्रेन्स पास कर रेलवे में और डाकखाने में बाबू ह......
अपनी अनुयायी दो लड़कियों के साथ बलात्कार के आरोपी, पहले से ही जेल में बन्द, ‘डॉ सन्त गुरमीत सिंह राम रहीम इंसान’ को एक पत्रकार को मारने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी। 16 साल पहले पत्रकार......
तुम्हारी सड़ी–गली व्यवस्था का पुर्जा बनने से बेहतर है उसके विरोध में आवाज उठाना तुम्हारी तानाशाही को सहने से बेहतर है तुम्हें सत्ता से बेदखल करना तुम्हारे टुकड़ों पर पलने से बेहतर है लड़कर अपना ह......
कुछ साल पहले मेघालय की 370 फीट गहरी एक सँकरी कोयला खदान में 15 मजदूर फँस गये। उन्हें बचाने के लिए चले बचाव अभियान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस बचाव अभियान के दौरान आधुनिक उपकरणों के अभाव......
आज से लगभग 15 साल पहले एक मजदूर परिवार मेरठ के गाँव नारंगपुर जाठोला से मलियाना में आकर बस गया था। गाँव के आर्थिक और सामाजिक परिवेश ने इस परिवार को जड़ से उखाड़ दिया। गाँव में खेती न होने और रोजी–रोटी ......
मजदूर एकता पुस्तिका के दूसरे अंक में मलियाना के उत्तरी इलाके में गिल्ली ठोकनेवाले मजदूरों का सर्वे छपा था। उस दौरान हमें कुछ ऐसे काम की भी जानकारी मिली जो इस इलाके की महिलाएँ करती हैं, उनमें आलू गोदाम......
मौत के मुँह में समाते सीवर सफाई कर्मचारी सीवर साफ करते हुए अक्सर किसी न किसी सफाई कर्मचारी की मौत की खबर आज आम हो चली हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी मौतों के बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम क्यों नही......
....मजदूर वर्ग ही दुनिया का निर्माण करने वाला है और जो दुनिया का निर्माण सकता है, तो वह उसे बदल भी सकता है। ......
मजदूरों की खराब हालत उन्हें प्रेरित करती है कि वे अपनी जिन्दगी को बेहतर बनायें। कुछ मजदूर अधिक मेहनत करके ज्यादा पैसे कमाकर अपनी जिन्दगी सुधारना चाहते हैं। वहीं, कुछ मजदूर अपने मालिक से लड़–झगड़कर अपना ......
...नौजवान मजदूर इस जिम्मेदारी से डरते नहीं। वे इसे स्वीकार करते हैं। समाज बदलने के लिए अपनी निजी जिन्दगी को पीछे रखते हैं।... मजदूरों को आपसी भेदभाव मिटाकर एका करके शोषण और अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहिए।.......
... अब हम इतिहास की ऐसी ही एक घटना से रूबरू होंगे। एक ऐसी घटना जहाँ मजदूरों ने अपनी संगठित ताकत के बल पर दुनिया में पहली बार 8 घण्टे के कार्यदिवस का कानून बनाने पर सरकार को मजबूर कर दिया था। इतिहास में इस घटना को ‘‘मई दिवस’’ के नाम से जानते हैं।......
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